बिहार में सियासी उलटफेर..एन डी ए गठबंधन टूटा…नीतीश कुमार का मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र.. अब राजद,कांग्रेस की मदद से बनेंगे दोबारा सी एम.

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राष्ट्रपति चुनाव की शुरुआत से ही जैसे कि तमाम आशंकाएं थी  उनको सच साबित करते हुए बिहार की राजनीति  में एक बार फिर भारी उलटफेर हो गया। मगर इस बार बाजी विपक्ष के हाथ लगी है। महाराष्ट्र की उथल पुथल के उलट बिहार में  आज मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एन डी ए का साथ छोड़ कर पुराने जोड़ीदार राष्ट्रीय जनता दल के साथ गठबंधन कर राज्य में बी जे पी को भारी झटका दे दिया। एन डी ए के सी एम पद से त्यागपत्र देने के बाद  राजनीति में पलटूराम के नाम से चर्चित नीतीश एक बार फिर पाँचवीं बार पलटी मारते हुए नए गठबंधन की सरकार बनाने का दावा भी कर चुके हैं। आखिर एन डी ए के मुख्यमंत्री के सामने ऐसी कौन सी समस्याएं पैदा हुई कि नीतीश कुमार इतना बड़ा कदम उठाने को मजबूर हो गए।  जद यू पार्टी के नेताओं द्वारा बी जे पी द्वारा अपनी सहयोगी पार्टी जनता दल यूनाइटेड  को कमजोर करने के आरोप के जवाब में प्रदेश सरकार में उद्योग मंत्री और बी जे पी नेता शाहनवाज हुसैन ने कहा कि उनकी पार्टी किसी को कमजोर नहीं करती बल्कि अपनी पार्टी को मजबूत करती है। मगर एक मजबूत गठबंधन को तोड़ कर नए गठबंधन के साथ सरकार बनाने पर सवाल फिर वहीं उलझ जाता है कि पिछले अनुभवों से सबक लेकर  यह नया गठबंधन क्या आपसी विश्वास के साथ भविष्य में  मजबूत रह पाएगा।  प्रदेश में सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल नीतीश को काम करने की खुली छूट देगा या फिर नीतीश कुमार के मन में प्रधानमंत्री बनाने की ख्वाहिश अभी तक जिंदा  है जिसके लिए भविष्य में नीतीश को प्रदेश की राजनीति  का मोह छोड़कर केंद्र की राजनीति में स्थापित करने का कोई वादा किया गया है ताकि आने वाले चुनावों में तेजस्वी का रास्ता साफ हो सके। मगर काँग्रेस के साथ गठबंधन रहते इसकी संभावनाएं कम ही लगती हैं। बहरहाल इस घटना ने एक बार फिर सिद्ध कर दिया है कि देश की राजनीति में अब नैतिकता नाम की कोई चीज नहीं बची है। देश के भविष्य के लिए ये सब अच्छा नहीं है।

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