1.उपभोक्ताओं के लिए खुशी की खबर...

  मोदी सरकार द्वारा देश में लागू कई पुराने कानूनों को समाप्त कर देना हो या उनमें संशोधन की प्रक्रिया हो मोदी सरकार हमेशा एक्शन में रहती है .इसी प्रक्रिया में केंद्र सरकार ने आज पुराने उपभोक्ता संरक्षण क़ानून 1986 में भी परिवर्तन कर उपभोक्ताओं के हितों की पूरी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए नये उपभोक्ता संरक्षण क़ानून 2019 को लागू करने की अधिसूचना जारी कर दी है,20 जुलाई से लागू होने वाले इस क़ानून के अंतर्गत अब विभिन्न उपभोक्ता अदालतों के साथ ही एक केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) भी बनाया गया है. अब किसी उत्पाद,वस्तु या सेवा के संबंध में भ्रामक विज्ञापन देने वालों और उत्पाद की बिक्री या दी गयी सेवाओं, उदाहरण के लिए वस्तु के ज्यादा दाम वसूलने, बिक्री की गयी वस्तु की गुणवत्ता में किसी भी प्रकार की कमी होने जैसे दोष सिद्ध होने पर जुर्माने के साथ सजा सुनाने का भी प्रावधान है. यहाँ तक कि उपभोक्ता के साथ दुर्व्यवहार पर भी उपभोक्ता इस प्राधिकरण में शिकायत दर्ज करा सकेगा. इस क़ानून की मुख्य विशेषता ये है कि अब कोई भी उपभोक्ता देश के किसी भी उपभोक्ता न्यायालय में अपना केस दर्ज करा सकेगा. भले ही उसने वह वस्तु कहीं से भी खरीदी हो.सरकार का दावा है किअब इस क़ानून के लागू हो जाने पर उपभोक्ताओं से जुड़े सभी विवादों को समय पर त्वरित गति से और प्रभावी तरीके से निपटाया जा सकेगा.

 2.बाबा को झटका…कोर्ट ने कोरोनिल(CORONIL) ट्रेडमार्क के इस्तेमाल पर 30 जुलाई तक लगाई रोक….

 मद्रास हाई कोर्ट ने बाबा रामदेव को CORONIL ट्रेडमार्क इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी है.अरुद्रा इंजीनियरिंग लिमिटेड द्वारा दायर एक याचिका पर फैसला देते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस दावे को अंतरिम तौर पर स्वीकार कर लिया कि CORONILट्रेडमार्क पर 1993 से उन का ही अधिकार है और कोरोना के इलाज का दावा करने वाली पतंजलि की दवा को CORONIL नाम से बेचने का कानूनी अधिकार उनके पास नहीं है. इससे पहले भी पतंजलि विवाद में उलझ चुका था जब कंपनी ने दावा किया था कि CORONIL से कोरोना का इलाज हो रहा है. बाद में आयुष मंत्रालय द्वारा पतंजलि को सिर्फ इस शर्त पर इस दवा को बेचने की अनुमति मिल पायी थी कि इस दवा को इम्युनिटी बूस्टर के रूप में ही बेचा जा सकता है कोरोना के उपचार के नाम पर नहीं .

 3. क्या कोरोना को  क़िस्मत का लिखा मान चुके हैं लोग ?…

    कोरोनामहामारी शुरू हुए लगभग सात महीने से ज्यादा हो चुके हैं.दुनिया में लाखों लोगों की जिंदगी छीन लेने वाला ये कोरोना वायरस अब लोगों को ज्यादा डरा नहीं पा रहा. यहाँ तक कि अब इसकी चर्चा मात्र रिकॉर्ड की संख्या तक रह गयी है तो क्या अब  लोग इस बीमारी को लेकर ज्यादा गंभीर नहीं रह गए हैं या फिर हमारी संवेदनशीलता ख़त्म हो चुकी है ? क्या अब लोग किस्मत का लिखा मानकर खामोश हो गए हैं?क्या एक बड़ी भीड़ की  बीमारी और  परेशानी सिर्फ आंकड़ा बन कर रह गयी है ?मौत चुपके से ना जाने कितने घरों में प्रवेश कर रही है और बाकी लोगों की जिंदगी कैसे आम जिंदगी जैसी चल रही है? ये सारे सवाल आज सभी के सामने है.कोरोना महामारी के इस दौर में हालात दिन प्रति दिन ख़राब होते जा रहे हैं.देश में अभी दस लाख से ज्यादा लोग इस महामारी की चपेट में आ चुके हैं और आज देश पूरी दुनिया में संक्रमण के हिसाब से तीसरे नंबर पर पंहुच चुका है और इसके पहले स्थान पर पहुंचने में भी ज्यादा देर नहीं दिखती फिर भी ज्यादातर लोग सरकार और स्वास्थ्य विभाग के द्वारा बताये गए बचने के तरीकों को अमल में नहीं ला रहे.विशेषज्ञ लगातार चेतावनी दे रहे हैं कि भारत में हालात और ख़राब होने वाले हैं.शायद दुनिया में जल्दी वैक्सीन बन जाने की उम्मीद और इंतज़ार के बहाने हम रोजमर्रा की जिंदगी में जरूरी एहतियात नहीं बरत रहे हैं. इसलिए आज की सबसे बड़ी जरूरत यही है  कि  सार्वजनिक स्थल पर हम मास्क  पहनें, दो गज़ की दूरी का ख़याल  अवश्य रखें. कोरोना को किस्मत का लिखा न मानें.

 4. रक्षा मंत्री पंहुचे बाबा की शरण…

    रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सी डी एस विपिन रावत के साथ आज अमरनाथ पंहुचे.वहां उन्होंने वेद मन्त्रों के साथ पवित्र शिव लिंग की विधिवत पूछा की और बाबा के दर्शन किये.

  5. राजस्थान मसले पर मायावती ने तोड़ी चुप्पी.बोलीं लगाया जाय राष्ट्रपति शासन…..

       राजस्थान में कांग्रेस के बीच अंतर्विरोध और एक दूसरे गुट का विरोधी गुटों पर आरोप प्रत्यारोप तो चालू हैं ही. विवाद बढ़कर न्यायालय तक पंहुच चुका है मगर अब राजस्थान विधानसभा चुनाव में 6सीट जीत चुकी बसपा की नेता मायावती ने आखिर अपनी चुप्पी तोड़ ही डाली. एक बयान में उन्होंने कहा है कि राज्य में लगातार जारी राजनीतिक गतिरोध ,आपसी उठापटक और सरकारी अस्थिरता के हालात पर राज्यपाल को प्रभावी संज्ञान लेकर वहां राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिस करनी चाहिए ताकि वहां लोकतंत्र की और ज्यादा दुर्दशा न हो जाय. मायावती का ये आक्रोश अशोक गहलोत सरकार के प्रति इसलिए भी है कि अपनी सरकार चलाने के लिए बसपा के सारे विधायकों को उन्होंने कांग्रेस में शामिल करवा कर मायावती हो बड़ा राजनैतिक झटका दिया था .

  6. असम बाढ़ पीड़ितों के लिए राहुल गांधी का बयांन..पूरा देश आपके साथ हर संभव मदद करेगी कांग्रेस…

      देश में मानसून के दस्तक देते ही असम में लगातार भारी बारिस के कारण भारी तबाही हो रही है. जहाँ केंद्र और राज्य सरकार लोगों को संकट से बचाने में जुटी हैं वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और संसद राहुल गांधी ने ट्वीट करके असम के लोगों की हौसला अफजाई की है. उन्होंने लिखा है कि
“पूरा देश असम के साथ है असम के लोग इस समस्या का सामना धैर्य और उनके आत्मनिर्णय स्वाभाव के साथ कर रहे हैं और वे इस आपदा से जरूर उबरेंगे”

7. क्या आपको पता है कि गाड़ियों की नंबर प्लेट किस किस रंग की होती हैं….

     आपकी जानकारी के लिए बताया जा रहा है कि सफेद नंबर प्लेट आम गाड़ियों के लिए, पीली प्लेट कमर्शियल गाड़ियों के लिए, काले रंग की प्लेट वाली गाड़ियां भी कमर्शियल ही होती हैं मगर ये किसी खास व्यक्ति के लिए अधिकृत होती हैं, हरे रंग की बैकग्राउंड वाली नंबर प्लेट इलेक्ट्रिक परिवहन वाहनों के लिए और नीली प्लेट विदेशी प्रतिनिधियों के लिए इस्तेमाल की जाती हैं .

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