Fri. May 28th, 2021

1.ब्लैक फंगस के लिए कहीं ऑक्सीजन ही तो कारण नहीं… 2..नहीं रहे वृक्षमित्र और पद्मविभूषण सुन्दर लाल बहुगुणा ….श्रद्धांजलि

देहरादून/मसूरी

1.ब्लैक फंगस के लिए कहीं ऑक्सीजन ही तो कारण नहीं…

                                   

पिछले कुछ दिनों से  कोरोना महामारी के सरकारी आंकड़ों के अनुसार देश के विभिन्न हिस्सों में संक्रमण में कमी होने की खबरों के साथ साथ देश के अनेक राज्यों के साथ उत्तराखंड प्रदेश में भी ब्लैक फंगस नाम की एक दूसरी बीमारी के पैर पसारने के कारण होने वाली मौतों की खबरें भी आने लगी हैं.राजस्थान में तो इस बीमारी को भी महामारी घोषित किया जा चुका है.जहाँ अभी तक दुनिया भर के कई वरिष्ठ डॉक्टर और साइंटिस्ट इस कोरोना बीमारी के कारणों का पता लगाने के लिए ही गहन अध्ययन और रिसर्च भी कर रहे हैं और  निष्कर्ष यही है कि कोरोना ही एक ऐसी बीमारी के रूप में सामने आयी है जिसके कारणों और इलाज के बारे में दुनिया भर के मेडिकल साइंस के विद्वान तक अभी तक एक निश्चित राय नहीं बना पाए है. भले ही इस बीमारी से बचाव के टीके बनाने का दावा कई देश कर चुके हैं और युद्ध स्तर पर अपने अपने देश के नागरिकों को टीका रूपी सुरक्षा कवच देने के प्रयास में जुटे हों मगर इसके इलाज के तरीकों का अभी तक कोई पक्का प्रमाण नहीं मिल पाया है. ये तथ्य समझने के लिए काफी है कि कुछ डॉक्टर इसके इलाज के लिए प्लाज्मा के इस्तेमाल की बात करते हैं तो कुछ लोग इस पर रोक लगाने और इससे होने वाले नुकसानों के प्रति सावधान करते हुए प्लाज्मा थ्योरी को ही नकार रहे हैं. सच तो ये है कि अभी भी इस बीमारी से बचाव की जिम्मेदारी नागरिकों पर ही डाली जा रही है.आखिर मास्क का उपयोग करना हो,सामाजिक दूरी बना कर रखनी हो या फिर सेनिटाइजेसन या हाथ धोना हो, ये किसी बीमारी के इलाज के वैज्ञानिक तरीके नहीं हैं मगर पूरी दुनिया में लोग अभी तक केवल यही कर रहे हैं या फिर सरकारें उनसे यही अपील कर रही हैं .

        जहाँ तक इस बीमारी के इलाज का सवाल है तो अधिकांशतः यही देखा गया है कि जब भी इस बीमारी के मरीज को अस्पताल पंहुचाया जा रहा है तो उसे सबसे पहले ऑक्सीजन की आवश्यकता महसूस हो रही है क्योंकि इसी ऑक्सीजन की कमी के कारण सैकड़ों लोग मौत का शिकार हो चुके हैं और दुर्भाग्यवश ग्रामीण क्षेत्रों में तो अभी भी हो रहे हैं क्योंकि जिस प्रकार का हेल्थ सिस्टम हमारे पर्वतीय क्षेत्रों में अभी तक की सभी सरकारों ने लोगों के स्वास्थ्य की चिंता में बना कर छोड़ा है,उस सिस्टम में तो शायद ही कभी दर्ज भी हो पाए. पहली बार लोगों को पता चला है कि आखिर ऑक्सीजन को प्राण वायु क्यों कहा जाता है. मगर अस्पताल हों या कोविड केयर सेण्टर इन सभी में इस प्राण वायु की भारी किल्लत को देख कर और फिर जानकारी की कमी कहें या अपनों की टूटती साँसों को बचाने की आस में समय की मजबूरी लोगों को पता ही नहीं था कि मरीजों के इलाज के लिए सिर्फ मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत होती है और क्योंकि इसका निर्माण अमेरिका के FDA नियम के अनुसार होता है इसलिए ये पूर्ण रूपेण शुद्ध होती है  जिसमें ऑक्सीजन सिलिंडर के भीतर किसी भी प्रकार की गन्दगी नहीं हो सकती अन्यथा ऐसी ऑक्सीजन इलाज में प्रयोग नहीं की जा सकती. मगर कहीं ऐसा तो नहीं कि मरीजों को जो सिलिंडर बाजार से या अप्रमाणित साधनों से उपलब्ध कराये गए हों उनमें मेडिकल ऑक्सीजन की जगह इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन भरी हो. इस संदेह का आधार भी यही है कि क्योंकि मेडिकल ऑक्सीजन को बनाने में काफी सावधानियां बरती जाती हैं जिसमें उच्चतम क्वालिटी कण्ट्रोल का ध्यान रखना आवश्यक होता है और इसको बनाने में समय भी अधिक लगता है जबकि  देश भर में नए नए ऑक्सीजन प्लांट बनाने की खबरें प्रमुखता से मिल रही हैं.अचानक ही अनेक ऑक्सीजन गैस सप्लाई के केंद्र मिलने लगे. एकाएक ऑक्सीजन रिफिलिंग सेण्टर की संख्या बढ़ने की खबरें भी इस आशंका को बल देती है कि कहीं कोई भूल चूक तो नहीं हो गयी. डॉक्टर्स और विशेषज्ञों ने ब्लैक फंगस बीमारी का एक प्रमुख कारण और आशंका भले ही लम्बे समय ऑक्सीजन सपोर्ट पर इलाज में रहे मरीजों केऑक्सीजन सपोर्ट सिस्टम में पानी की अशुद्धता में जताई हो मगर ऑक्सीजन की कमी की आपाधापी और लाचारी में  जरूरतमंदों को ना जाने कौन कौन से ऑक्सीजन प्लांटों से लगातार भरे मिल रहे सिलिंडर की अशुद्ध ऑक्सीजन ही कहीं मरीजों में ब्लैक फंगस नाम की इस जानलेवा बीमारी का कारण न बन रही हो जिनमें मेडिकल ऑक्सीजन की जगह परअशुद्ध इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन भरी हो.

 *इस लेख को WHO और ICMR के ऑफिसियल ट्विटर अकॉउंट पर भी भेजा जा रहा है.*

2. नहीं रहे वृक्षमित्र सुन्दर लाल बहुगुणा……super7news परिवार द्वारा हार्दिक संवेदनाएं और श्रद्धांजलि.

.      …..चिपको ….              .

क्या हैं जंगल के उपकार, मिट्टी, पानी और बयार।
मिट्टी, पानी और बयार, जिन्दा रहने के आधार।

ये नारा देने वाले और देश दुनिया में ख्यातिप्राप्त चिपको आंदोलन के पुरोधा पद्म विभूषण सुन्दर लाल बहुगुणा का देहांत…कुछ दिनों पूर्वे कोरोना इलाज के लिए ऋषिकेश एम्स में थे भर्ती.  सुन्दरलाल बहुगुणा का जन्म 9जनवरी सन 1927  को देव भूमि उत्तराखंड के मरोडा नामक स्थान पर हुआ और मृत्यु आज 21 मऺई 2021 को ऋषिकेश में हुई.

super7news परिवार द्वारा हार्दिक संवेदनाएं और श्रद्धांजलि.

(आगे ..अगले अंकों में…
अपनी गलतियों से क्यों सबक नहीं ले रही कांग्रेस..जनता का मूड भांपने में क्यों होती है नाकामयाब…
जवाबदेही का डर छोड़ कांग्रेस का नेतृत्व करें राहुल… .)

Spread the love

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

You may have missed