सुधरो इंडिया सुधरो ………..सरकारें गंभीर तो जनता असावधान क्यों……… राहत के दौरान अत्यधिक सावधानी ही कम्युनिटी संक्रमण से बचाव का एक मात्र तरीका..

COVID-19 महामारी से बचाव के तरीकों में जुटी भारत सरकार देश में लॉक डाउन फेज-3 में पंहुच चुकी है. रोज किये जाने वाले टेस्ट की संख्या भी बढ़ चुकी है मगर कल जरा सी  छूट मिलने पर ही  जनता का व्यवहार तो यही दिखाने के लिए काफी है कि अभी तक उसे बीमारी की गंभीरता का ज्यादा एहसास ही नहीं है.जिस महामारी में दुनिया भर में रोज हजारों लोग अपनी जान गँवा रहे हैं,उस बीमारी के रोकथाम के दौरान लोगों को जो एहतियात बरतनी चाहिए वो कहीं दूर दूर नजर नहीं आयी. जबकि हकीकत यह है कि जैसे जैसे देश लॉक डाउन अवधि में आगे बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे प्रति दिन संक्रमित लोगों और मरने वालों की संख्या में भी वृद्धि होती जा रही है. इन परिस्थितयों में विशेषज्ञों की इस चेतावनी पर विश्वास होने लगता है कि अभी तक इस बीमारी का असली रूप दिखाई ही नहीं दिया है और यह बहुत बड़ी संख्या में लोगों की जान लेने को आतुर है.पूरी दुनिया में अभी तक लगभग 36 लाख लोगों को संक्रमित कर और ढाई लाख से ज्यादा लोगों की साँसे थाम लेने के बाद भी इसका प्रकोप कम नहीं हो पा रहा है. अब वास्तविकता यही है कि दुनिया को इस बीमारी के शुरू होने की तारीख का भी विश्वसनीय रूप से ज्ञान ही नहीं है. फ्रांस के एक डॉक्टर के इस दावे पर कि उसके पास फरवरी के महीने में आये एक मरीज का ब्लड सैंपल उसने अब टेस्ट किया तो वो कोरोना संक्रमित पाया गया,विश्वास करें तो यही सिद्ध होता है कि अभी तक देशों के पास इस बीमारी की शुरुआत के समय का ही पूरा ज्ञान नहीं है और यही सबसे बड़ी चिंता का विषय है. अब सरकारों के पास ज्यादा से ज्यादा टेस्ट करने के अलावा कोई चारा नहीं है.मगर रोज हो पाने वाले टेस्ट की संख्या को देखते हुए इसके रिजल्ट मिलने  में ही महीनो का समय लग सकता है. जिससे सरकारों के सामने ये बड़ी समस्या होगी कि  बिना संक्रमित क्षेत्रों और अज्ञात संक्रमित लोगों की पूरी जानकारी मिले  इलाज कैसे और किसका होगा सरकारें कैसे कैसे और कहाँ कहाँ एक्शन करेंगी. इस बीमारी में सबसे बड़ा खतरा यह भी है कि बिना संक्रमण के लक्षणों के भी ये बीमारी फ़ैल रही है और एक भी छूटा हुआ संक्रमित मरीज ही बहुत बड़ी समस्या बन सकता है.

वहीं इसी क्रम में आज भारत सरकार केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने बताया कि बीते 24 घंटे में कोरोना संक्रमण के 3,900 नए मामले सामने आये और 195 लोगों की मौत भी हुई है.भारत में एक दिन में कोविड-19 के नए मामले सामने आने और इस वायरस की वजह से हुई मौतों का यह अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है.इसके साथ ही भारत में कोरोना संक्रमित मरीज़ों की कुल संख्या 46,433 हो गई है और इनमें से 1,558 लोगों की संक्रमण से मौत हो चुकी है.भले ही राहत की बात ये भी है कि इन्ही बीते 24 घंटे के दौरान भारत में 1020 मरीज़ ठीक भी हुए हैं. जो कि कुल मरीजों का 27.4 % है. मगर लॉक डाउन में दी गयी राहतों केदौरान  यदि  जरूरी सावधानियों का पालन न किया गया तो भारत में संक्रमण की गति भी बड़ी तेजी से  फैल सकती है. वैसे सरकार की तैयारियों से तो यही लगता है कि लॉक डाउन 1 और 2 के दौरान मिले समय में वह बीमारी के सामुदायिक संक्रमण फ़ैलने की सबसे बुरी अवस्था के लिए भी आवश्यक तैयारियां और प्रबंध में गंभीरता के जुटी रही है जिसमे रेलवे की बोगियों तक को हॉस्पिटल रूम में बदलने, देश में वेंटीलेटर के निर्माण में तेज प्रगति और संभावित मरीजों के लिए उनकी उपलब्धता हो या फिर , पी पी ई किट का प्रबंध हो सरकार अपनी और से तैयारी कर चुकी दिखती है  मगर सबसे पहले लोगों का दायित्व  यही बनता है कि वो बीमारी की गंभीरता को समझें और विशेषकर सोशल डिस्टन्सिंग का पूरा पालन करें वरना हमारे देश का सामजिक ताना बाना इस प्रकार से बना है कि बीमारी कौन से क्षण सामुदायिक बीमारी का रूप ले ले कहा नहीं जा सकता. इस बीमारी से बचने के लिए हमें गंभीर और जागरूक नागरिक बनना ही होगा…..

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