लॉक डाउन पार्ट 3….राहत कहीं आफत न बन जाय……

weuttarakhand mediaसे साभार.

3 मई को समाप्त लॉक डाउन -2 के बाद लागू लॉक डाउन-3 में दी गयी राहतें कहीं आफत न बन जांय. लोगों को सोशल डिस्टन्सिंग बना कर रहने की बार बार दी गयी चेतावनियों के बावजूद आज से जारी लॉक डाउन 3 में जिस प्रकार से लोगों ने सरकार द्वारा दी राहतों के दौरान सोशल डिस्टन्सिंग को जितना नजरअंदाज किया उससे तो यही लगता है कि आने वाला समय और कठिनाइयों से भरा हो सकता है. देश भर से प्राप्त सूचनाओं का आकलन करने पर तो यही नजर आ रहा है कि विशेषकर शराब की दुकानों के बाहर जिस प्रकार से लोगों की भारी भीड़ इकट्ठी हुयी और जिस प्रकार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर प्रसारित हो रही हैं उससे स्पष्ट है कि इस दौरान ज्यादातर जगहों पर सोशल डिस्टन्सिंग का जरा सा भी ध्यान नहीं रखा गया.कई जगह तो पुलिस को ताकत का प्रयोग भी करना पड़ा. मसूरी में एस डी एम वरुण चौधरी की लगातार सक्रियता और सख्ती के कारण लोगों ने जागरूकता का परिचय देते हुए सोशल डिस्टन्सिंग का पालन किया. कुलड़ी बाजार में खुली शराब की दुकान के बाहर खरीदार पहले से बनाये गए गोल घेरे में खड़े रह कर अपनी बारी का इंतज़ार करते पाए. गए. दुनिया भर में हेल्थ एक्सपर्ट चेतावनी दे रहे हैं कि संक्रमण का दौर और बड़े रूप में लौट सकता है.इसे रोकने के लिए उनकी राय यही है कि ज्यादा से ज्यादा टेस्ट किये जांय और उनकी रिपोर्ट के आधार पर सरकारें आगे कार्यवाही करें. पूरी दुनिया में कई देशों में लॉक डाउन शुरू किये लगभग दो महीने हो चुके हैं मगर संक्रमण की रिपोर्ट लगातार बढ़ती जा रही हैं. अब किसी फेज में कम या ज्यादा अनुपात में इसका बढ़ना टेस्ट की संख्या और इलाकों पर निर्भर करता है. भारत में अभी तक 319 जिले ग्रीन जोन में, 284 जिले ऑरेंज जोन में, 130 जिले रेड जोन में घोषित किये गए हैं. मगर यदि ग्रीन जोन में ही टेस्ट की संख्या बढ़ा दीं जाय तो कब कौन ग्रीन जोन ऑरेंज या फिर रेड जोन में तब्दील हो जाय कुछ कहा नहीं जा सकता. COVID-19 के लिए टेस्ट ही संक्रमण के द्वारा विभिन्न आबादी में होने वाले जोखिमों की जानकारी देता है।ये सभी देश समझ रहे हैं कि टेस्ट के बिना हमारे पास महामारी को समझने का कोई और तरीका ही नहीं है।यह वायरस के प्रसार और प्रभाव को धीमा करने और कम करने की लड़ाई में हमारे सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। टेस्ट हमें संक्रमित व्यक्तियों की पहचान करने और फिर उन्हें प्राप्त चिकित्सा उपचार का मार्गदर्शन करते हैं। यह संक्रमित लोगों के आइसोलेशन और उनके संपर्कों की ट्रेसिंग और जरूरत पड़ने पर विशिष्ट क्षेत्रों को कन्टेनमेंट करने में सक्षम बनाता है और देश में स्वास्थ्य सेवाओं की कमी होने के कारण यह चिकित्सा संसाधनों और कर्मचारियों को आवश्यकता के अनुसार आवंटित करने में भी मदद कर सकता है।टेस्ट रिजल्ट्स के विश्वसनीय डाटा के बिना हम खतरे का उचित जवाब नहीं दे सकते. वर्तमान में संक्रमित लोगों की सही संख्या किसी भी देश को नहीं पता है। हम अभी सिर्फ वही संख्या जानते हैं जिन लोगों का संक्रमण टेस्ट हो चुका है और उसके रिजल्ट्स मिल चुके हैं.अर्थात देश और दुनिया में संक्रमित होने वाले लोगों की कुल संख्या नहीं है। COVID-19 से संक्रमित लोगों की सही संख्या कहीं अधिक हो सकती है. देश में 292 सरकारी और 97 निजी अस्पतालों में अब रोज लगभग 74 हजार आरटी-पीसीआर टेस्ट किये जा रहे हैं. सरकारी सूत्रों के अनुसार अभी तक दस लाख से भी ज्यादा टेस्ट हो चुके हैं. भले ही दुनिया के अन्य देशों में किये गए टेस्ट रिजल्ट्स के अनुपात के आधार पर  भारत में संक्रमितों की संख्या कम है मगर भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक बीते 24 घंटे में देश भर में 2553 नए मामले सामने आए तथा 67 लोगों की मौत ही संक्रमण केस बढ़ने की ये रफ़्तार यही सिद्ध करने के लिए काफी है कि जैसे जैसे देश में टेस्ट की संख्या बढ़ती जाएगी वैसे वैसे संक्रमित लोगों की संख्या भी बढ़ने का अनुमान है और भारत जैसे बड़े और घनी आबादी वाले देश में यही सबसे बड़ी चिंता सरकार के सामने भी हो सकती है. मगर जिस प्रकार से आज राहतों के पहले ही दिन शराब की दुकानों के सामने भारी भीड़ इकट्ठी हो गयी ,सोशल डिस्टन्सिंग मानकों को जिस प्रकार से लोगों ने नजर अंदाज किया,उस से तो लगता है कि लोगों को दी गयी राहत कहीं लोगों के लिए ही आफत न बन जाय.

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