ओमिक्रोन की दस्तक? संभलने और संभालने की जरूरत, बाद में पछताना न पड़े

उत्तराखंड देहरादून
ये सच है की जीवन में घटने वाली बुरी घटनाओं को भुलाकर जीवन चलते रहना चाहिए क्योंकि जीवन चलने का नाम है मगर जीवन चलाने के साथ जीवन बचाना भी जरूरी होता है। कोरोना की पिछली दस्तक का डरावना मंजर किसी ने तो परिवार सहित भुगता है मगर देखा सभी ने है। न जानें कितने लोगों ने अपने प्रिय जनों को हमेशा के लिए खो दिया है। कोरोना का खौफ अभी कम ही हुआ था कि इसके दूसरे वैरिएंट ओमिक्रोन ने दुनिया में खलबली मचानी शुरू कर दी है। लगातार इसके संक्रमण के बढ़ने की खबरें आने लगी हैं। कुछ देशों में तो लॉकडाउन की नौबत आ चुकी है और खतरे की बात ये है कि अब इसने अपने देश में भी दस्तक दे दी है। केंद्र सरकार और प्रदेशों की सरकारें नागरिकों से कोविड पूर्ण व्यवहार बरतने की अपील कर रही हैं मगर देखा गया है कि लोगों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा और ज्यादातर लोग भारी असावधानियां करने की भूल कर रहे हैं। वैज्ञानिकों ने बार बार कहा है कि इसके संक्रमण की दर पिछली से कई गुना अधिक है और जरा सी चूक भारी पड़ सकती है। इसलिये सभी से अपील है कि क्रिसमस और नए वर्ष के दौरान बस थोड़ी सी सावधानी बरतें। जान है तो जहान है। नया साल तो हर साल आता है, मगर जीवन नहीं लौटता।
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