उत्तराखंड में शुरू होने वाली चार धाम यात्रा… लाखों के चेहरों पर एक ही चिंता …..क्या होगा.. अबकी बार?

 

भारत सरकार के आदेश पर उत्तराखंड में भी फिलहाल 14 अप्रैल तक लॉकडाउन लागू है.इसी माह यहां देश विदेश में विशेष महत्व रखने वाली चार धाम यात्रा के अंतर्गत 25 अप्रैल गंगोत्री, 27अप्रैल यमुनोत्री में तथा 29 अप्रैल बद्रीनाथ व 30 अप्रैल को केदार नाथ के कपाट खुलने का मुहूर्त है. वर्त्तमान परिस्थितियों में कपाट तो खोल दिए जाएंगे मगर भगवान के दर्शनों के लिए भक्तों का यहाँ पहुंचना बहुत बड़ी समस्या बन सकता है. राज्य सरकार के अनुसार केंद्र और राज्य सरकार के सामने आज कोरोना महामारी से निपटने की बड़ी और गंभीर चुनौती है।हाल ये है कि राज्यों व जिलों की सीमाएं तक सील हैं.ऐसे में राज्य से बाहर या राज्य के भीतर ही यात्रियों के लिए सीमाएं खोले जाने से सरकार के लिए सामाजिक दूरी को बनाए रखना आसान नहीं होगा।और सामजिक दूरी रखना ही इस महामारी से बचाव का एक मात्र उपाय भी बताया जा रहा है. 2013 केदारनाथ आपदा के बाद चारधाम यात्रा में यात्रियों की संख्या में भारी गिरावट के बाद राज्य और केंद्र सरकारों के अथक प्रयासों और लोगों की मजबूत धार्मिक आस्था और विश्वास के बल पर चार धाम यात्रा तो जल्दी ही वापिस पटरी पर लौट आयी है.पिछले साल ही रिकॉर्ड लगभग 43 लाख तीर्थ यात्री उत्तराखंड में धार्मिक यात्राओं पर पहुंचे थे. मगर इस बार कोरोना वायरस ने स्थिति को बिलकुल पलट दिया है. हालात ये है कि 14 अप्रैल तक लोगों को घरों की भीतर ही रहने के लिए कहा गया है .पूरे देश में धार्मिक स्थलों के भीतर लोगों को जाने की इजाजत ही नहीं है.पिक्चर हाल,मॉल,सरकारी ऑफिस,ज्यादातर बाजार सब बंद हैं, हवाई यात्रा, रेल यात्रा तथा राज्यों की परिवहन सेवाओं को पूर्ण रूपेण बंद किया जा चुका है. यात्रा  से जुड़े लोगों की निगाहें सरकार पर लगी हैं, लेकिन राज्य में कोरोना वायरस के संक्रमण के खतरे को देखते हुए सीमाएं यात्रियों के लिए खोलने पर अभी संदेह है।अब सरकार का अगला कदम क्या होगा ये तो कुछ दिनों में स्पष्ट हो ही जाएगा मगर सवाल यही है कि 14 अप्रैल के बाद लॉक डाउन हटाने की स्थितियों में भी इस ताजा संकट से जूझ रहे लोग क्या अपने घरों से बाहर निकलने और भीड़ में यात्रा करने का साहस जुटा पाएंगे भले ही सरकार उन्हें कितना भी भरोसा दिलाये मगर इसकी संभावनाएं तो बहुत क्षीण ही लगती हैं.और यही परिस्थिति यहाँ की राज्य अर्थव्यवस्था को डांवाडोल कर सकती है.लगभग बारह हजार करोड़ रुपये का व्यवसाय लगभग ठप्प होने की आशंका है क्योंकि लगभग अधिकांश एडवांस बुकिंग कैंसिल हो चुकी हैं.बड़े व्यापारी तो किसी तरह से फिलहाल इस संकट को झेल सकते हैं मगर उन छोटे व्यवसाइयों का क्या होगा जिनकी रोजी रोटी इसी यात्रा के दम पर चलती है. रोजगार की लिए लिए गए लोन की वापसी भी उनके लिए फिलहाल बहुत बड़ी समस्या बन जाएगा .उन कमर्शियल वाहनों और टैक्सी मालिकों और उनके ड्राइवर का क्या होगा?उनकी गाड़ियों के EMI कैसे चुकता होगी? ये वायरस उनके परिवारों को बड़े कष्ट और तकलीफों में डालने वाला है.माना कि आज लॉक डाउन की अवधि में राज्य सरकार और तमाम स्वयंसेवी संगठन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद के लिए सक्रिय हैं. केंद्र सरकार के निर्देशों से डर कर बैंक भी EMI पर चुप हैं मगर लॉक डाउन हटाने की स्थिति में ये सब भी बंद होना ही है.राज्य सरकार को चाहिए कि ऐसे लोगों की एक विस्तृत सूची बनाकर केंद्र सरकार से उनके लिए फौरी सहायता के तौर पर जरूरी मदद मांगे जिससे कि ऐसे लाखों उत्तराखंड वासियों को एक एहसास हो कि भले ही वक्त उनके साथ अन्याय कर सकता है मगर उनकी एक सरकार है जो उनके दुखों को कुछ कम करने का प्रयास कर रही है. असल में यही सरकार का काम भी है..और दायित्व भी…

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