“अग्निपथ” योजना …मिलेगी 46 हजार अग्नि वीरों को 4 साल के लिए नौकरी….सरकार की क्या है मंशा? कई राज्यों में युवाओं का उग्र विरोध

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इसमें कोई दो राय नहीं हैं कि प्रधानमंत्री मोदी ने बड़ी मेहनत से विदेश नीति में बहुत बड़ी कूटनीतिक सफलताएं हासिल की हैं मगर आंतरिक मसलों में सरकार कई विवादास्पद निर्णय ले रही है। ताजा उदाहरण केंद्र सरकार की नई “अग्निपथ” योजना है जिसमें 17 साल 6 महीने से 21 साल  के 46 हजार युवाओं को अग्निवीर बनाने की घोषणा की गई है। जय जवान जय किसान का नारा इस समय विचारों में घूम रहा है क्योंकि  किसानों के कल्याण के  लिए घोषित  नए कृषि कानूनों का हश्र सबके सामने है मगर शायद सरकार ने इससे सबक नहीं सीखा  और अब रक्षा सेनाओं में  जवानों के चयन के  लिए अग्निपथ योजना का युवाओं में ही भारी विरोध शुरू हो गया  है विशेषकर उत्तरप्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड,हरियाणा  जैसे राज्यों के युवा एक बड़े उग्र  आंदोलन की शुरुआत कर चुके  हैं और  आज ही इस योजना के विरोध में अनेक राज्यों में जगह जगह आगजनी,चक्काजाम और पथराव हुआ बिहार में तमाम रेलयात्राएं रोक दी गई हैं यहाँ तक कि रोहतक में एक युवा ने जान  तक दे दी है। ज्ञातव्य है कि सेना में  इन्ही राज्यों से ज्यादातर युवा भर्ती होते हैं और  इन्हीं  राज्यों से बड़ी संख्या में युवा सेना में जवान से लेकर अधिकारी बनने का सपना भी  देखते हैं। युवाओं का ये उग्र विरोध सरकार के लिए नई परेशानियाँ पैदा कर सकता है। ज्यादातर युवाओं का मानना है कि चार साल के लिए सैनिक बनाना एक बचकाना कदम है क्योंकि पहले 6 महीने ट्रैनिंग और उसके बाद 3.5 साल की अस्थायी नौकरी में कौन अपनी पूरी शक्ति और योग्यता से काम कर पाएगा फिर 4 साल   बाद 11.7 लाख की एक मुश्त रकम देने की बात  सरेआम धोखा है। अब सैनिक को संविदाकर्मी  बना देना नौकरी नहीं बल्कि सैनिक शब्द का अपमान है।चार साल बाद जो भी 25% पुनः नौकरी पाएँगे उनकी वर्तमान सेना में अलग से पहचान होगी जिसमें पेंशन ग्रेच्युटी नहीं होंगी।

                                         क्या है अग्निपथ योजना का वेतन ढांचा …

                                काँग्रेस,सपा ,बसपा आदि विपक्षी दल भी  इस योजना को युवाओं के साथ छल से ज्यादा कुछ नहीं मानते। राहुल गांधी ने ट्वीट किया है कि ” न कोई रैंक, न कोई पेंशन न 2 साल से कोई direct भर्ती न 4 साल के बाद स्थिर भविष्य न सरकार का सेना के प्रति सम्मान देश के बेरोज़गार युवाओं की आवाज़ सुनिए, इन्हे ‘अग्निपथ’ पर चला कर इनके संयम की ‘अग्निपरीक्षा’ मत लीजिए, प्रधानमंत्री जी। बसपा नेत्री मायावती ने लगातार  ट्वीट किया कि 1. सेना में काफी लम्बे समय तक भर्ती लम्बित रखने के बाद अब केन्द्र ने सेना में 4 वर्ष अल्पावधि वाली ’अग्निवीर’ नई भर्ती योजना घोषित की है, उसको लुभावना व लाभकारी बताने के बावजूद देश का युवा वर्ग असंतुष्ट एवं आक्रोशित है। वे सेना भर्ती व्यवस्था को बदलने का खुलकर विरोध कर रहे हैं।2. इनका मानना है कि सेना व सरकारी नौकरी में पेंशन लाभ आदि को समाप्त करने के लिए ही सरकार सेना में जवानों की भर्ती की संख्या को कमी के साथ-साथ मात्र चार साल के लिए सीमित कर रही है, जो घोर अनुचित तथा गरीब व ग्रामीण युवाओं व उनके परिवार के भविष्य के साथ खुला खिलवाड़ है।3. देश में लोग पहले ही बढ़ती गरीबी, महंगाई, बेरोजगारी एवं सरकार की गलत नीतियों व अहंकारी कार्यशैली आदि से दुःखी व त्रस्त हैं, ऐसे में सेना में नई भर्ती को लेकर युवा वर्ग में फैली बेचैनी अब निराशा उत्पन्न कर रही है। सरकार तुरन्त अपने फैसले पर पुनर्विचार करे, बीएसपी की यह माँग। सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस योजना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना  साधते हुए कहा कि यह देश और देश के युवाओं के लिए घातक सिद्ध होगी । उन्होंने ट्वीट किया कि देश की सुरक्षा कोई अल्पकालिक और औपचारिक विषय  नहीं है यह एक अति गंभीर  व दीर्घकालिक नीति की अपेक्षा रखती है। सैन्य भर्ती को लेकर जो खानापूर्ति करने वाला और लापरवाही भरा रवैया अपनाया जा रहा है वह देश और देश के युवाओं के भविष्य की रक्षा के लिए घातक साबित होगा। अग्निपथ से पथ  पर अग्नि न हो।

                           बहरहाल सरकार की इस विवादास्पद योजना का क्या हश्र होगा यह तो  भविष्य के गर्भ में है मगर सरकार को यदि इस योजना को सफल बनाना है तो उसे चार साल बाद सभी लोगों को रोजगार की गारंटी देनी होगी। चार साल के बाद बेगार कौन चाहेगा? यह एक अति गंभीर विषय है और देश की रक्षा सेनाओं पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ना निश्चित होने के साथ ही देश की सुरक्षा  के प्रति  चिंता का विषय भी है।

 

 

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